Kathak Gharana Raigarh
SKU: 9788188827459
₹1,500.00 Regular Price
₹1,125.00Sale Price
-रायगढ़ नर्तन अति अलबेला, हाव भाव हेला रस तोड़ा परनों का है जोड़ा बोल बंदिशों का है रेला, अतिमनभावन नाम सुहाना 'दास' रायगढ़ कथक घराना रायगढ़ नर्तन अत्यंत सौन्दर्य पूर्ण है। यहाँ की हर रचनायें (तोड़ा) हाव-भाव और हेला से युक्त होकर रसानुभूति कराती है। कथक के अन्य घरानों के परणों के जोड़े डूबहू यहाँ पर निर्मित हुए। रायगढ़ के महाराजा चक्रधर सिंह द्वारा रचित ग्रन्थ नर्तनसर्वस्वम् और मुरजपर्णपुष्पाकर बोल बंदिशों का वृहद कोष है। जिसमें सैकड़ों दुर्लभ बोल बंदिशों का सचित्र वर्णन है। प्रत्येक बोल का एक विशिष्ट नाम है। जो अत्यंत मन भावन और सुहाना है। ये बोल अपने नाम के अनुकूल भावों को व्यक्त करने में पूर्ण सक्षम है। यहाँ की सभी रचनाओं में नाट्य के तत्वों का समावेश देखने को मिलता है। प्रत्येक रचना में शब्दों का चयन इतना सटिक एवं सुंदरतापूर्वक किया गया है कि उसकी अनुकूल प्रस्तुति से उस रचना के नाम में निहित भाव साकार हो उठते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि यहाँ की हर रचना में एक विषयवस्तु है जिसकी प्रस्तुति में नाट्य के तत्वों का समावेश है। यहाँ की सभी रचनायें शब्दात्मक, काव्यात्मक, ध्वन्यात्मक, दृश्यात्मक, भावात्मक और रसात्मक हैं। उपर्युक्त विशेषताओं के कारण महाराजा चक्रधर सिंह द्वारा रचित सभी रचनाओं में पूर्ण रसानुभूति होती है। यहाँ की रचनायें आचार्य भरत द्वारा रसनिष्पत्ति के संबंध में कहे गये सूत्र (विभावानुभावव्याभिचारीभावसंयोगाद्रसनिष्प त्त) का ज्वलंत उदाहरण हैं।
No Reviews YetShare your thoughts.
Be the first to leave a review.

