Kathak Rachnatmak Srajan Ke Aayam
SKU: 9788188827541
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-प्रस्तुत किताब में कथक-देह से रचित सृजन के उन आयामों को स्पर्श करने का प्रयास किया है, जो देह की सीमा को सीमातीत कर जाती है। मौन से मुखर होती देह की रचना का सृजन सरल नहीं है, यहा सम्पर्ण देह, मन व बुद्धि के रचनात्मक आयाम है, जिनमें भावों की अभिव्यंजना प्रमुख है। प्रस्तुत आलेखों में कथक संरचना में समाए भावों की शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक अनन्तता के साथ इनके सृजन में समाए समस्त दार्शनिक, श्रृंगारिक, आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक एवम् वैज्ञानिक तथ्यों को कथक के शास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषित किया गया है। कथक की संरचना का सृजन किस तरह देह की आन्तरिक परतों से प्रवाहित हो बाहय धरातल पर प्रस्फुटित होता है व किन-किन आन्तरिक व बाह्य आयामों को क्षितिज को रेखांकित करता है, यही किताब में संकलित शोध लेखों का उद्देश्य है। वस्तुतः आनन्द व सौन्दर्य से सिक्त अर्न्तमन जब, चरम उत्कर्ष पर पहुँच भावों द्वारा मुक्त उच्छवास लेते हैं तब इनकी तरंगें देह व मन को स्वतः थिरकन दे जाती है और यही थिरकन सृजन के रचनात्मक सौन्दर्य में समाते हुए नृत्य से परिभाषित हो जाती है। अर्न्तमन की श्वासों के साथ स्पन्दित कथक रचना किस तरह कलाकार के बाह्य घरातल पर रूप, रस, गन्ध, शब्द व स्पर्श वन सृजित होती है व ससीम से असीम को रच जाती है, यही विचारना किताब का उद्देश्य है। मेरे विचार जो शब्दों में समाए हैं किन्तु आतुर है कलाकार देह की थिरकन में सामने, शब्दों की जीवन्तता ही किताब का उद्देश्य है।
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