Nritya Aur Sangeet
SKU: 9788188827411
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-यह पुस्तक प्राचीन साहित्य जैसे संस्कृत, प्राकृत एवं पाली आदि भाषाओं के गहन अध्धयन से प्राप्त शोध-विषयक ज्ञान एवं जानकारियों से खोज स्वरूप निकला सहज-ज्ञान है। जिसमें सभी कलाओं जैसे चित्रकला, मूर्तिकला, नृत्यकला, संगीतकला (वाघ) एंव नाट्यकला आदि सम्पूर्ण ललित कलाओं से संबंधित जानकारियों एवं ज्ञान को एक ही पुस्तक में आत्मसात् कर संजोया है। उपरोक्त सभी कलाओं की प्राचीनता हमारे प्राचीन साहित्यों से ही प्राप्त होती है जिससे परिचित होकर उसके वर्तमान स्वरूप, परिवर्तित रूप को समझने में सहायता मिलती है। यह पुस्तक चित्रकला एवं मूर्तिकला में नृत्य एंव संगीत (वाघ) एंव नाट्य प्राचीन एवं प्रारम्भिक रूप स्वरूप, से लेकर वर्तमान तक के क्रमिक विकसित रूप को दर्शाती है। प्राचीन गुफा चित्रों, मूर्तियों, नृत्य भंगिमाओं, नृत्य शैलियों, संगीत-वाघों एवं प्राचीन रंगमंचों को खोजने, समझने, पहचानने का प्रयास किया गया है। इनसे सभी कला साधकों, कला रसिकों को रूबरू कराने का एक छोटा-सा कार्य है। वैसे यह एक वृहद कला-विषय है जिस पर और भी अधिक उत्कृष्ठ कार्य आगामी पुस्तक में देने का प्रयास रहेगा। यह पुस्तक अपने रूप-कला-ज्ञान के आधार पर लिखी गई है। जिसमें मध्यप्रदेश की प्राचीन कला (चित्रकला एवं मूर्तिकला) में नृत्य एंव संगीत (वाघ) कलाओं का स्वरेखांकित चित्रों द्वारा उल्लेख किया है। प्रगैतिहासिक काल से लेकर गुप्तकाल तक के नृत्य संगीत (वाघ) एवं नाट्य-गहों का वर्णन है। जो कि सभी कला रसिकों, कलासाधकों, पाठकों, विधार्थियों एवं शोधर्थियों के लिए अत्यन्त ज्ञानोपयोगी एवं लाभप्रद पुस्तक सिद्ध होगी ।
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