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Taalprastar Taladhyaya Acharya Laxminarayan Vichrit`sangitaSuryodaya'

Taalprastar Taladhyaya Acharya Laxminarayan Vichrit`sangitaSuryodaya'

SKU: 9788188827435
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-संगीतसूर्योदय ग्रंथ की रचना आचार्य लक्ष्मीनारायण ने 13वीं शती के संगीत रत्नाकर (शाङ्गदेव कृत) के आधार पर की है। इस ग्रंथ की सम्पूर्ण प्रतिलिपि मद्रास के "Madras Government Oriental Manuscripts Library" में सुरक्षित है। इस ग्रंथ की चर्चा भरतकोष की भूमिका में की गई है। इस ग्रंथ का सम्पादन, संशोधन कार्य इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छ.ग.) के सहयोग से विद्वान् पण्डित प्रो. कामताप्रसाद त्रिपाठी के द्वारा किया गया है। इस ग्रंथ का मुद्रण सन् 1986 में बाबूलाल जैन महावीर प्रेस, मेलूपुर, वाराणसी द्वारा किया गया है। यह ग्रंथ संगीतरत्नाकर से प्रभावित है फिर भी इसकी अपनी मौलिक विशेषता परिलक्षित होती है। ग्रंथ के प्रारम्भ में जहाँ एक ओर विजयनगर के महराजा कृष्णदेव राय की विजय यात्रा का वर्णन किया गया है, वहीं प्रथम अध्याय का प्रारम्भ 'तालाध्याय' के रूप में। यह अपने आप में एक अनूठी विशेषता है। इस ग्रंथ में कुल पाँच अध्याय-तालाध्याय, नृत्ताध्याय, स्वरगताध्याय, जात्यध्याय तथा प्रबंधाध्याय हैं। इस ग्रंथ के प्रारम्भ में पाँचों अध्यायों की वर्ण्य वस्तुएँ क्रमशः उद्दिष्ट हैं। ताल के दस प्राण को स्वीकारते हुए ध्रुव, चित्र, वार्तिक और दक्षिण के साथ पंचम मार्ग के रूप में 'क्षिप्र' को भी स्थान दिया गया है। संगीतरत्नाकर के तालाध्याय में जहाँ द्रुत, लघु, गुरु तथा प्लुत-इन चार अंगों से ताल प्रस्तार का वर्णन मिलता है वहीं आचार्य लक्ष्मीनारायण नें पूर्व में अनुद्रुत को सम्मिलित कर पाँच अंगों का प्रस्तार किया है। इन पाँच अंगों के आधार पर प्रस्तार क्रम में विभिन्न मेरुओं की वर्णना से ग्रंथ में नवीनता एवं मौलिकता के स्वरूप दष्टिलभ्य हैं। विराम मेरुओं
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